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सोमवार, 19 मार्च 2018

सच क्यों करे भरोसा सबका

 ग़ज़ल
PHOTO by Sanjay Grover







सच को ना औज़ार चाहिए
कुछ पागल तैयार चाहिए

सच क्यों जाए मंदिर-मस्ज़िद
सच को सच्चे यार चाहिए

सच क्यों करे भरोसा सबका !
सच तुमको बीमार चाहिए !

सच ना पंजाबी-मद्रासी
सच को सच्चा प्यार चाहिए

कौन जिया है सच की ख़ातिर
सब को इश्तेहार चाहिए 

सच अपने पैरों प खड़ा है
सच को ना गुरु-द्वार चाहिए
      
करनी है गर सच से दोस्ती
ज़हनो-दिल तैयार चाहिए

झूठों का संयुक्त माफ़िया
सच में पूरी धार चाहिए

सच न माफ़िया, सच न काफ़िया
सच को सच तकरार चाहिए




-संजय ग्रोवर
19/20-03-2018

शनिवार, 2 मई 2015

Make Money Online

अपने ब्लॉग पर कहीं बस इतना लिख दीजिए-


या कुछ यूं लिख दीजिए-


या यूं लिख दीजिए-


फिर देखिए ख़ज़ाने के खोजी कहां-कहां से होकर आपके ब्लॉग पर पहुंचते हैं।

अगर आप कभी इस रास्ते पर निकले हैं तो क्या लेकर लौटे हैं, चाहें तो यहां शेयर कर सकते हैं।

(यह पागलपन सिर्फ़ आपके मनोरंजन के लिए है, सीरियसली न लें)

शनिवार, 20 जुलाई 2013

मेरे क़दमों में आ गिरी खिड़की

ग़ज़ल

एक खिड़की से दूसरी खिड़की
ज़िंदगी रह गई निरी खिड़की

आसमां जिसपे, बंद दरवाज़ा
उसके जीवन में बस झिरी खिड़की

कुछ तो देखा भी करदो अनदेखा
बन न जाए ये झुरझुरी खिड़की

उसके ख़्वाबों पे क्या गिरी बारिश ?
उसके आंसू में क्यों तिरी खिड़की !

सर मेरा आसमां से टकराया
मेरे क़दमों में आ गिरी खिड़की


-संजय ग्रोवर

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