एक ऐसी जगह है जहां लोग, अकसर, घंटों अकेले बातचीत करते हैं.
*पागलखाना* ==== बचकाना, अहमकाना, बेवकूफ़ाना, जाहिलाना, फ़लसफ़ाना, फ़लाना, ढिकाना....सब कुछ अनियोजित, अनियंत्रित, अनियमित, अघोषित....जब हमें ही कुछ नहीं पता तो आपको कैसे बताएं कि हम क्या करने वाले हैं....
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बुधवार, 17 अगस्त 2016
शनिवार, 5 मार्च 2016
रुटीन
लघुव्यंग्यकथा
महापुरुष वहां घास की तरह उगते थे।
गधे कभी भी उन्हें चर जाते थे।
-संजय ग्रोवर
05-03-2016
महापुरुष वहां घास की तरह उगते थे।
गधे कभी भी उन्हें चर जाते थे।
-संजय ग्रोवर
05-03-2016
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