*पागलखाना* ==== बचकाना, अहमकाना, बेवकूफ़ाना, जाहिलाना, फ़लसफ़ाना, फ़लाना, ढिकाना....सब कुछ अनियोजित, अनियंत्रित, अनियमित, अघोषित....जब हमें ही कुछ नहीं पता तो आपको कैसे बताएं कि हम क्या करने वाले हैं....
शनिवार, 20 अप्रैल 2019
सोमवार, 25 मार्च 2019
सचके बारे में झूठ क्या बोलूं
ग़ज़ल
ये तो हारा हुआ घराना है
इस ज़माने को क्या हराना है
ये तो बचपन से मैंने देखा है
ये ज़माना भी क्या ज़माना है
वक़्त से दोस्ती करो कैसे
वक़्त का क्या कोई ठिकाना है
सच का हुलिया ज़रा बयान करो
सच को सच से मुझे मिलाना है
सचके बारे में झूठ क्या बोलूं
सच भी झूठों के काम आना है
सचसे बच्चों को डराता है तमाम
झूठ भी कितना वहशियाना है
मेरा जो सच है, मेरा अपना है
इसको झूठा नहीं बनाना है
-संजय ग्रोवर
26-03-2019
ये तो हारा हुआ घराना है
इस ज़माने को क्या हराना है
ये तो बचपन से मैंने देखा है
ये ज़माना भी क्या ज़माना है
वक़्त से दोस्ती करो कैसे
वक़्त का क्या कोई ठिकाना है
सच का हुलिया ज़रा बयान करो
सच को सच से मुझे मिलाना है
सचके बारे में झूठ क्या बोलूं
सच भी झूठों के काम आना है
सचसे बच्चों को डराता है तमाम
झूठ भी कितना वहशियाना है
मेरा जो सच है, मेरा अपना है
इसको झूठा नहीं बनाना है
-संजय ग्रोवर
26-03-2019
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