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सोमवार, 25 मार्च 2019

सचके बारे में झूठ क्या बोलूं

ग़ज़ल

ये तो हारा हुआ घराना है
इस ज़माने को क्या हराना है

ये तो बचपन से मैंने देखा है
ये ज़माना भी क्या ज़माना है

वक़्त से दोस्ती करो कैसे
वक़्त का क्या कोई ठिकाना है

सच का हुलिया ज़रा बयान करो
सच को सच से मुझे मिलाना है

सचके बारे में झूठ क्या बोलूं
सच भी झूठों के काम आना है

सचसे बच्चों को डराता है तमाम
झूठ भी कितना वहशियाना है

मेरा जो सच है, मेरा अपना है
इसको झूठा नहीं बनाना है 

-संजय ग्रोवर
26-03-2019

मंगलवार, 2 अक्टूबर 2018

सच में या अफ़साने में / मंटो पागलखाने में


ग़ज़ल 
created by Sanjay Grover











सच में या अफ़साने में
मंटो पागलखाने में

मंटो, तेरे और मेरे
है क्या फ़र्क़ ज़माने में

सच लोगों को भाता हैं
सिर्फ़ रहे जब गाने में

झूठ को मैंने खोया है
अपने सच को पाने में

हर पगले का नाम लिखा
सच के दाने-दाने में

-संजय ग्रोवर
02-10-2018

शनिवार, 20 जनवरी 2018

पहले करता है ज़िक़्रे-आज़ादी/माफ़िया तब ग़ुलाम करता है

ग़ज़ल

इससे जो मिलके काम करता है
माफ़िया एहतिराम करता है

तुम्हारा डर है माफ़िया की ख़ुशी
माफ़िया ऐसे काम करता है

पहले करता है ज़िक़्रे-आज़ादी
माफ़िया तब ग़ुलाम करता है

हिंदू, मुस्लिम हैं सब क़ुबूल इसे
माफ़िया आदमी से डरता है

नाम, पैसा, रुआब क्या चहिए
माफ़िया इंतज़ाम करता है


माफ़िया के जो काम आ जाए
नाम उसके इनाम करता है

माफ़िया से मिला लो हाथ अगर
माफ़िया ओस जैसे झरता है

तुम भले शब्द एक ही बोलो
माफ़िया अर्थ चार करता है

माफ़िया दाएं भी है बाएं भी
माफ़िया चमत्कार करता है

माफ़िया कितना तो अकेला है
मुझ अकेले पे वार करता है

आपमें दम है अगर, शक़ करलो
माफ़िया सबसे प्यार करता है

माफ़िया है, जवाब क्यों देगा!
माफ़िया बहिष्कार करता है 

माफ़िया को शरम नहीं आती
वो तो बस शर्मसार करता है

माफ़िया यूं बड़ा ही सामाजिक
सारे पीछे से काम करता है

माफ़िया इसका, उसका, सबका है
जो भी उसको सलाम करता है

ख़ुद कोई क्यों तमाम होगा भला
माफ़िया सबका काम करता है


-संजय ग्रोवर
20-01-2018




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