*पागलखाना* ==== बचकाना, अहमकाना, बेवकूफ़ाना, जाहिलाना, फ़लसफ़ाना, फ़लाना, ढिकाना....सब कुछ अनियोजित, अनियंत्रित, अनियमित, अघोषित....जब हमें ही कुछ नहीं पता तो आपको कैसे बताएं कि हम क्या करने वाले हैं....
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मंगलवार, 6 सितंबर 2016
गुरुवार, 11 अगस्त 2016
बात से बात- 8/डायरेक्ट वाले भगवान भी तो नहीं आते...
छोटी-सी छाती पर से बड़े-बड़े रीति-रिवाज गुज़रते रहे.....
बुधवार, 10 अगस्त 2016
Baat Se Baat-7/बात से बात-7/(आ भी जाओ कभी)
एक ऐसी जगह है जहां लोग, अकसर, घंटों अकेले बातचीत करते हैं.
मंगलवार, 2 अगस्त 2016
पागलखाना एफ़ एम : बात से बात-5/निराकार में भी कुछ नहीं रक्खा.....
एक ऐसी जगह है जहां लोग, अकसर, घंटों अकेले बातचीत करते हैं.
गुरुवार, 28 जुलाई 2016
सोमवार, 25 जुलाई 2016
गुरुवार, 3 सितंबर 2015
सुनो घोड़ो
लघुव्यंग्य
जो भी मुझपर दांव लगाएगा, शर्त्तिया हारेगा।
क्योंकि मैं कोई घोड़ा नहीं हूं, आदमी हूं।
पूरी तरह आज़ाद एक आदमी।
-संजय ग्रोवर
03-09-2015
जो भी मुझपर दांव लगाएगा, शर्त्तिया हारेगा।
क्योंकि मैं कोई घोड़ा नहीं हूं, आदमी हूं।
पूरी तरह आज़ाद एक आदमी।
-संजय ग्रोवर
03-09-2015
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