कटाक्ष लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
कटाक्ष लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 13 नवंबर 2022

पाबंद का छंद

सुबह सैर को चल दिए, कविवर का आनंद

नियमित बेईमान थे नियमों के पाबंद


नियमों के पाबंद ने इक दिन काम निकाला

पैसे लेजा पैसे देकर काम कराला 


दूजा बोला कवि  हो या हो भ्रष्टाचारी

बोले इसपर भी लिक्खूंगा कविता प्यारी


-संजय ग्रोवर




सोमवार, 6 अगस्त 2018

बच्चे न पैदा करने की सुंदर भावना पर एक निबंध


उनसे मैं बहुत डरता हूं जो वक़्त पड़ने पर गधे को भी बाप बना लेते हैं। इसमें दो-तीन समस्याएं हैं-


1.      बाप बनना बहुत ज़िम्मेदारी का काम है। ऐसे ज़िम्मेदार बाप का दुनिया को अभी भी इंतेज़ार है जो सोच-समझ के बच्चा पैदा करे। वैसे जो सोचता-समझता होगा वो क्या बच्चा पैदा करेगा ?                        
                             
2.    फिर मैं गधा भी नहीं हूं कि किसी भी गधे का बाप बन जाऊं। जो हमारे पिताजी ने नहीं सोचा वो हम सोच लें तो क्या हर्ज़ है ? सोच के नाम पर हम हमेशा पीछे ही जाते रहेंगे क्या 

3.    सिर्फ बाप बनने के लिए दुनिया-भर के गधों से एडजस्ट करना (एक मुहावरे के अनुसार सबको बाप बनाना) मुझे नुकसान में रहना ही लगता है।
                                 
4.    सारी पृथ्वी एक परिवार है, कभी-कभी दूसरों के बच्चों से खेल लेने में हर्ज़ ही क्या है ? मैं तो जब भी घर से निकलता हूं, दूसरों के बच्चों से ही खेलता हूं। घर में अपने पिताजी के बच्चे यानि ख़ुदसे खेलता हूं।

5.     मुझे लगता है कि ‘मैं तो अपना ही बच्चा पैदा करुंगा, दूसरे बच्चों को दूसरे बच्चे ही समझूंगा’ यह घमंडी और स्वार्थी होने की पहचान है।

किसीको आपत्ति ?

-संजय ग्रोवर

04-08-2018


बुधवार, 5 अक्टूबर 2016

इधर भी फ़र्ज़ी उधर भी फ़र्ज़ी

पज़ल

इधर भी फ़र्ज़ी उधर भी फ़र्ज़ी
सिलते-सिलते थक गए दर्ज़ी

नीचे वाला चमचा बोला
ऊपर वाले तेरी मर्ज़ी

बहरे, मोहरे, चेहरे, दोहरे
टोपें-तोपें गरज़ी-वरज़ी

झूठ ही जीता, झूठ ही हारा
‘सच’ बोला यही मेरी मरज़ी

राज़ छुपाना काम है जिनका
उन्हींको दो पाने की अरज़ी

उनका तो नाटक भी दुख है
मेरी तो बांछे भी लरज़ी


-संजय ग्रोवर
05-10-2016

शनिवार, 6 जून 2015

ईश्वर बनाम परदा

व्यंग्य

ईश्वर कभी सामने क्यों नहीं आता, वह परदे में क्यों रहता है ?

1. वह अपने ही बनाए लोगों से डरता है.

2. वह शर्मीला है, बहुत ज़्यादा शर्मीला है.

3. उसकी सोच बहुत पिछड़ी हुई है.

4. वह इस व्यवहारिक दुनिया की सर्दी और गर्मी बर्दाश्त नहीं कर सकता, इसलिए ख़्वाबों-ख़्यालों में रहना पसंद करता है.

5. उसे हिंदी, अग्रेज़ी, चीनी, जापानी, फ्रेंच, जर्मन.....कोई भाषा नहीं आती.....वह बात कैसे करेगा ?

6. ईश्वर के कपड़े मैले हो गए हैं, उसने ऑनलाइन ऑर्डर दे रखा है और नये कपड़ों का इंतज़ार कर रहा है.....

7. ईश्वर डरता है कि लोग उसे पहचानेंगे कैसे! क्योंकि सारी दुनिया में उसकी इतनी अलग़-अलग़ तरह की तस्वीरें डिस्ट्रीब्यूट की गई हैं कि किसी एक तस्वीर की शक़्ल दूसरी तस्वीर से नहीं मिलती. और असली ईश्वर को किसीने देखा नहीं है.

8. ईश्वर मिठाई से डरता है, वह जानता है कि लोग उसकी मूर्तियों तक को मिठाई के अलावा कुछ नहीं देते। ऊपर से उसकी जान-पहचान में कोई अच्छा डॉक्टर नहीं है जो डाइबिटीज़ का इलाज जानता हो.

9. ईश्वर बीमार है और इस हालत में लोगों के सामने आया तो लोगों का विश्वास उसपर से उठ जाएगा.

10. असलियत ईश्वर नहीं है असलियत तो वह परदा है जिसके पीछे उसे बनानेवालों का यह राज़ छुपा है कि ईश्वर सिर्फ़ एक झूठ है.

???

-संजय ग्रोवर


05-06-2015

ब्लॉग आर्काइव