ग़ज़ल़
उनका इनसे समझौता है
घिन का घिन से समझौता है
13-07-2014
ज़रा चुभाना, बड़ा दिखाना
ख़ून का पिन से समझौता है
इधर भी छुरियां, उधर भी छुरियां
और मक्खन से समझौता है
17-10-2015
नामुमकिन कुछ कहां रहा अब
सब मुमक़िन है, समझौता है
शाम को दोनों वहीं मिलेंगे
रात का दिन से समझौता है
13-07-2014
-संजय ग्रोवर
17-10-2015
उनका इनसे समझौता है
घिन का घिन से समझौता है
13-07-2014
ज़रा चुभाना, बड़ा दिखाना
ख़ून का पिन से समझौता है
इधर भी छुरियां, उधर भी छुरियां
और मक्खन से समझौता है
17-10-2015
नामुमकिन कुछ कहां रहा अब
सब मुमक़िन है, समझौता है
शाम को दोनों वहीं मिलेंगे
रात का दिन से समझौता है
13-07-2014
-संजय ग्रोवर
17-10-2015