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शनिवार, 17 अक्टूबर 2015

शाम को दोनों वहीं मिलेंगे

ग़ज़ल़

उनका इनसे समझौता है
घिन का घिन से समझौता है
13-07-2014

ज़रा चुभाना, बड़ा दिखाना
ख़ून का पिन से समझौता है

इधर भी छुरियां, उधर भी छुरियां
और मक्खन से समझौता है
17-10-2015

नामुमकिन कुछ कहां रहा अब
सब मुमक़िन है, समझौता है

शाम को दोनों वहीं मिलेंगे
रात का दिन से समझौता है
13-07-2014




-संजय ग्रोवर
17-10-2015



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