सोमवार, 27 नवंबर 2017

सामाजिक एडजस्टमेंट

एक समय की बात है एक अजीब-सी जगह पर, बलात्कार करनेवाले, बलात्कृत होनेवाले, बलात्कार देखनेवाले, बलात्कार का इरादा रखनेवाले सब मिल-जुलकर रहते थे।

बीच-बीच में वे न जाने किसका विरोध और शिक़ायत करते रहते थे।

शायद कोई त्यौहार मनाते हों!

-संजय ग्रोवर

सोमवार, 25 सितंबर 2017

हिटलर-बटलर

हास्य-व्यंग्य



पता नहीं कितने भाई-बहिन थे पर दो का मुझे पता है-हिटलर और बटलर....

हिटलर ख़बरें बनाता था और बटलर उन्हें बताकर लोगों को डराता था...

‘सारी टॉफ़ियां मुझे दे दो वरना मेरा बड़ा भाई हिटलर बहुत बदमाश है, वह आकर तुमसे छीन लेगा....’ बच्चों को समझाते हुए बटलर बिलकुल किसी-भी यूनिवर्सिटी का प्रोफ़ेसर लगता.....


इस तरह दोनों भाई दिन-भर में कई टॉफ़ियां जमा कर लेते।

उनमें से दो-चार उन बच्चों को दे देते जो उनकी हरक़तो पर चुप्पी साधे रखते, बाक़ी सब ख़ुद गड़प कर जाते।


-संजय ग्रोवर
25-09-2017




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