गुरुवार, 21 जून 2018

सच जब अपनेआप से बातें करता है

ग़ज़ल
creation : Sanjay Grover












सच जब अपनेआप से बातें करता है
झूठा जहां कहीं भी हो वो डरता है

दीवारो में कान तो रक्खे दासों के
मालिक़ क्यों सच सुनके तिल-तिल मरता है

झूठे को सच बात सताती है दिन-रैन
यूं वो हर इक बात का करता-धरता है

सच तो अपने दम पर भी जम जाता है
झूठा हरदम भीड़ इकट्ठा करता है

झूठ के पास मुखौटा है किरदार नहीं
सच की ख़ाली जगह वही तो भरता है 


-संजय ग्रोवर
21-06-2018

बुधवार, 9 मई 2018

दो लोगों में इक सच्चा इक झूठा है....

By Sanjay Grover
ग़ज़ल



पहले सब माहौल बनाया जाता है
फिर दूल्हा, घोड़े को दिखाया जाता है

झूठ को जब भी सर पे चढ़ाया जाता है

सच को उतनी बार दबाया जाता है

दो लोगों में इक सच्चा इक झूठा है

बार-बार यह भ्रम फैलाया जाता है


आपस में यूं मिलने-जुलने वालों में

बारी-बारी भोग लगाया जाता है

जिन्हें ज़बरदस्ती ही अच्छी लगती है

उनको घर पे जाके मनाया जाता है

गिरे हुए भी कई बार गिर जाते हैं
कुछ लोगों को यूं भी उठाया जाता है

देते हैं जो सबको भिक्षा की शिक्षा
उनसे ही हर मंच सजाया जाता है

वर्तमान में अगर नहीं कुछ करना हो
मिल-जुलकर इतिहास बताया जाता है

बननेवाले बार-बार बन जाते हैं
फिर भी बारम्बार बनाया जाता है




-संजय ग्रोवर
09-05-2018
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