रविवार, 21 अगस्त 2016

भ्रामक

लघुकथा/व्यंग्य

मुझे उससे बात करनी थी।



‘मेरे पास आज जो कुछ भी है सब ईश्वर का दिया है’, वह बोला।
‘जो करता है ईश्वर ही करता है, उसकी मर्ज़ी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता’, वह फिर बोला।
‘आप मेरे पास बात करने आए, ईश्वर की बड़ी मेहरबानी है’, एक बार फिर उसने किसी ईश्वर के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की।



‘ठीक है, जब सब ईश्वर ने ही किया है तो मैं बात भी उन्हींसे कर लूंगा’, मैंने कहा,‘आप उन्हें बुलाकर मुझे सूचित कर दीजिएगा या साथ लेकर मेरे घर आ जाईएगा....’, बात पूरी करके मैं चला आया।



तबसे आज तक न तो कोई सूचना आई है न वे ख़ुद आए हैं।

-संजय ग्रोवर
21-08-2016



बुधवार, 17 अगस्त 2016

Baat Se Baat-9 ( ज़िंदगी अगर अभिनय है तो ...... )

एक ऐसी जगह है जहां लोग, अकसर, घंटों अकेले बातचीत करते हैं.

गुरुवार, 11 अगस्त 2016

बात से बात- 8/डायरेक्ट वाले भगवान भी तो नहीं आते...

छोटी-सी छाती पर से बड़े-बड़े रीति-रिवाज गुज़रते रहे.....
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