गुरुवार, 23 फ़रवरी 2017

नालायक

सभी नालायक एक-दूसरे को बहुत लाइक/पसंद करते हैं।

एक जैसे जो होते हैं।

वैसे वे किसी काम के हो न हों पर एक-दूसरे के बहुत काम आते हैं।

मिलजुलकर भी अकेले सच से वे डरते हैं।

अंततः एक दिन वे ख़ुदको श्रेष्ठ और अकेले सचको नालायक घोषित कर देते हैं।

मज़े की बात यह है कि उसके बाद भी उनका डर ख़त्म नहीं होता।

नालायक जो होते हैं।

उनकी एकता हमेशा लायक आदमी के खि़लाफ़ होती है।

एक भी उदाहारण ऐसा देखने में नहीं आता जिसमें उन्होंने किसी नालायक का कुछ बिगाड़ कर दिखाया हो।

वे नालायकों का कुछ बिगाड़ेंगे तो उन्हें लाइक कौन करेगा ? 

(जारी)

-संजय ग्रोवर
24-02-2017

रविवार, 5 फ़रवरी 2017

बेईमानी

लघुकथा

वह हमारे घरों, दुकानों, दिलों और दिमाग़ों में छुपी बैठी थी और हम उसे जंतर-मंतर और रामलीला ग्राउंड में ढूंढ रहे थे।


-संजय ग्रोवर
05-02-2017
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