बुधवार, 30 मार्च 2011

दल्ला मेरे पीछे है तो सट्टा मेरे आगे..

बाज़ीचा-ए-क्रिक्रेट है दुनिया मेरे आगे
होता है शबो-रोज़ तमाशा मेरे आगे

गो फ़ाइल को जुंबिश नहीं, बल्ले में तो दम है
हफ्ते से बड़ा हो गया छक्का मेरे आगे

कुछ तंज़ करने वालों से यूं कहती है क्रिकेट
दल्ला मेरे पीछे है तो सट्टा मेरे आगे

सर फोड़े है मुंह भींचके हॉकी मेरे होते
रोए है गला फाड़के फुटबॉल मेरे आगे

(मिर्ज़ा ग़ालिब से क्षमा-याचना सहित)

2 टिप्‍पणियां:

  1. अरे वाह आज तो ग़ालिब चाचा भी नाच रहे होंगे लुंगी फाड़ के.........हिप हिप हुर्रे हिप हिप हुर्रे ......
    इंडिया जीत गया....

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  2. कल खेल, खेल की तरह लगा। किसी खिलाड़ी के चेहरे पर ‘मरने-मारने’ का भाव नहीं था। ऐसी जीत में मज़ा आया।

    उत्तर देंहटाएं

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