गुरुवार, 31 दिसंबर 2015

शौक़े-मशहूरी भी ग़ज़ब है जनाब!

ग़ज़ल

किसीने दी जो उनको ग़ाली है-
क्या उनकी फ़िल्म आनेवाली है !?
16-12-2015

शौक़े-मशहूरी भी ग़ज़ब है जनाब!
ख़ूब तरक़ीब भी निकाली है 

मूर्ख आपस में उलझ जाएंगे-
आपकी मौज आनेवाली है
31-12-2015

वो जो नक़ली हैं, सर पे बैठे हैं
जो बिठाए, बेचारा जाली है !?

आप छेड़ें तो ये हुनर है जनाब
और वो दूसरा, मवाली है !?
16-12-2015

-संजय ग्रोवर
31-12-2015



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